धनतेरस और यम दीपदान: क्या खरीदें, दीया कब और किस दिशा में जलाएँ
YajmanConnect संपादकीय टीम · 17 अक्टूबर 2026
दीपावली के पाँच दिन के उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। यह कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाई जाती है, और 2026 में धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को है। इसे धन त्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती भी कहते हैं।
धनतेरस क्यों मनाई जाती है
पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय इसी तिथि को भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। वे आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं, इसलिए यह दिन अच्छे स्वास्थ्य की कामना से भी जुड़ा है। धनतेरस पर धन के देवता कुबेर और माँ लक्ष्मी की भी पूजा होती है।
पूजा का समय
धनतेरस की पूजा और दीपदान प्रदोष काल में, यानी सूर्यास्त के बाद लगभग ढाई घंटे के भीतर करना उत्तम माना जाता है। नई दिल्ली में 6 नवंबर को प्रदोष काल लगभग शाम 5:32 से रात 8:09 तक है। आपके शहर में सूर्यास्त के हिसाब से यह समय कुछ मिनट आगे-पीछे होगा, जिसे नवंबर 2026 व्रत कैलेंडर और आज का पंचांग में देख सकते हैं।
यम दीपदान: विधि
धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार के बाहर यमराज के नाम का दीया जलाने की परंपरा है, जिसे यम दीपदान कहते हैं। मान्यता है कि इससे परिवार अकाल मृत्यु के भय से सुरक्षित रहता है।
- आटे या मिट्टी का चौमुखा दीया लें और उसमें सरसों या तिल का तेल डालें।
- प्रदोष काल में दीया जलाकर मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके रखें, क्योंकि दक्षिण को यम की दिशा माना जाता है।
- दीया रखते समय परिवार की सलामती की प्रार्थना करें। कई घरों में यह दीया घर का सबसे बड़ा सदस्य रखता है।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ है
परंपरा में इस दिन नई चीज़ घर लाना शुभ माना जाता है। यह खरीदारी अपनी क्षमता के अनुसार ही करें; शुभ फल का संबंध कीमत से नहीं, भाव से है।
- बर्तन: पीतल, तांबे या स्टील का नया बर्तन। कई परिवार उसमें कुछ भरकर ही घर लाते हैं।
- सोना-चाँदी: सिक्का या छोटा गहना, यदि बजट हो।
- झाड़ू: नई झाड़ू को लक्ष्मी के स्वागत और दरिद्रता हटाने का प्रतीक माना जाता है।
- साबुत धनिया: पूजा में चढ़ाकर बाद में गमले या खेत में बोया जाता है।
- दीये और पूजा सामग्री: दीपावली के लिए मिट्टी के दीये, बत्ती, खील-बताशे।
कई घरों में धनतेरस पर लोहे या धारदार चीज़ें न खरीदने की मान्यता है, लेकिन यह क्षेत्र और परिवार की परंपरा पर निर्भर करता है।
सरल पूजा क्रम
- शाम को घर साफ़ करके पूजा स्थान पर धन्वंतरि, कुबेर और लक्ष्मी-गणेश का चित्र रखें।
- दीपक जलाकर गणेश जी का स्मरण करें, फिर धन्वंतरि जी से अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
- कुबेर और लक्ष्मी को रोली, अक्षत, फूल और नैवेद्य अर्पित करें। नए बर्तन या सिक्के को भी पूजा में रखें।
- आरती के बाद मुख्य द्वार पर यम दीपदान करें।
तिथि और प्रदोष काल का समय खगोलीय गणना पर आधारित है। परिवार की परंपरा के अनुसार पुरोहित से पुष्टि कर लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
धनतेरस 2026 कब है?
धनतेरस 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को है। पूजा और यम दीपदान प्रदोष काल में करें।
यम दीपदान किस दिशा में करते हैं?
दीया घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके रखा जाता है।
धनतेरस पर क्या खरीदें?
बर्तन, सोना-चाँदी (बजट के अनुसार), नई झाड़ू, साबुत धनिया और दीपावली के दीये खरीदना शुभ माना जाता है।
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