देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह 2026: चातुर्मास का समापन, व्रत और विवाह की विधि
YajmanConnect संपादकीय टीम · 17 अक्टूबर 2026
कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि आषाढ़ की देवशयनी एकादशी से चार महीने योगनिद्रा में रहने के बाद भगवान विष्णु इसी दिन जागते हैं। इसके साथ चातुर्मास पूरा होता है, और विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कामों के मुहूर्त फिर से शुरू होते हैं।
2026 में तारीख और पारण
2026 में देवउठनी एकादशी का व्रत 20 नवंबर, शुक्रवार को रखा जाएगा। नई दिल्ली के अनुसार एकादशी तिथि 20 नवंबर सुबह 7:16 से 21 नवंबर सुबह 6:31 तक है। व्रत का पारण 21 नवंबर को दोपहर 12:08 से 2:15 के बीच करना है, क्योंकि उससे पहले हरि वासर रहेगा। अपने शहर का समय नवंबर 2026 व्रत कैलेंडर में देखें।
व्रत और पूजा
- सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
- शाम को आँगन या पूजा स्थान पर गेरू और चूने से भगवान के चरण बनाए जाते हैं, और गन्ने का मंडप सजाया जाता है।
- घंटा, शंख या थाली बजाकर "उठो देव, बैठो देव" कहते हुए भगवान को जगाया जाता है।
- सिंघाड़ा, शकरकंद, गन्ना, बेर जैसे मौसमी फल अर्पित किए जाते हैं।
- एकादशी व्रत के सामान्य नियम, जैसे अन्न और चावल न खाना, इस दिन भी लागू होते हैं। स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार रखें।
तुलसी विवाह
देवउठनी एकादशी या अगले दिन, द्वादशी को, तुलसी विवाह किया जाता है। इसमें तुलसी के पौधे का विवाह भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम से कराया जाता है। 2026 में कई परिवार 20 नवंबर की शाम को और कई 21 नवंबर (द्वादशी) को यह विवाह करेंगे। अपनी परंपरा के अनुसार दिन चुनें।
तुलसी विवाह की सरल विधि
- तुलसी के गमले को साफ़ करके गेरू से रंगें, और चारों ओर गन्ने का मंडप बनाएँ।
- तुलसी जी को लाल चुनरी, चूड़ियाँ, बिंदी और सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
- शालिग्राम जी (या विष्णु जी की प्रतिमा) को तुलसी के पास दाईं ओर रखें।
- घर का कोई सदस्य कन्यादान करने वाले के रूप में और कोई वर पक्ष के रूप में बैठता है। मंत्र या विवाह गीत के साथ शालिग्राम जी को हाथ में लेकर तुलसी की सात परिक्रमा कराई जाती है।
- आरती के बाद प्रसाद बाँटें। कई घरों में इसी दिन से शादी-ब्याह की बातचीत शुरू करने की परंपरा है।
इसके बाद विवाह मुहूर्त
देवउठनी एकादशी के बाद नवंबर-दिसंबर 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त हैं, लेकिन मध्य दिसंबर से खरमास शुरू होने पर ये फिर रुक जाते हैं। तारीखें विवाह मुहूर्त 2026-27 में देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
देवउठनी एकादशी 2026 कब है?
20 नवंबर 2026, शुक्रवार को। पारण 21 नवंबर को दोपहर 12:08 से 2:15 (नई दिल्ली) के बीच।
तुलसी विवाह किस दिन करें?
देवउठनी एकादशी की शाम या अगले दिन द्वादशी को, यानी 20 या 21 नवंबर 2026, परिवार की परंपरा के अनुसार।
देवउठनी एकादशी के बाद शादियाँ कब तक होंगी?
नवंबर और दिसंबर 2026 में मुहूर्त हैं; खरमास शुरू होने पर मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी तक विवाह नहीं होते।
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